Bade din ho gaye

When I was four years old, my mum always told me that happiness was the key to a good life, then I went to school and my teacher asked me what I wanted to be when I grew up. I said I wanted to be “HAPPY”.
To this she told “You didn’t understand the assignment, but me the mumma’s girl told her you didn’t understand life.”
I understood and believe that someday everything that appears now weird or irrelevant will make perfect sense. I understood there are no apologies, no excuses, noone to lean on, rely on or to blame. Its your journey and you are responsible for the quality of it. Laugh on your confusions, find reasons to smile in midst of tears and remember everything happens for a reason, infact a good reason. It may not feel the way at present but it will enrich you with the experiences to grow, it will give you an understanding that everything is temporary, time has no time for moments to hold. So, if its a bad moment, it shall pass .

And, if its a good moment, it will become a cherished memory.
Memories “that last and can be created..”

*बड़े दिन हो गए*
इतने channels होने पर भी लगता है कुछ नहीं देखा चित्रहार देखने की इंतज़ार को बड़े दिन हो गए
अब 2 रोटी खाकर चिंता कि वजन न बढ़ जाये
वो स्कूल से लौटकर 5-5 रोटी खाये *बड़े दिन हो गए…..।*
ये बारिशें आजकल
रेनकोट में सूख जाती हैं…
सड़कों पर छपाके उड़ाए *बड़े दिन हो गए*…. ।
अब सारे काम सोच समझ कर करती हूँ ज़िन्दगी में….
वो पहली गेंद पर बढ़कर छक्का लगाये *बड़े दिन हो गए*…।
वो ढ़ाई नंबर का क्वेश्चन पुतलियों में समझाना…
किसी दोस्त को नक़ल कराये *बड़े दिन हो गए*…. ।
जो कहना है
फेसबुक पर डाल देती हूँ….
*किसी को* चुपके से चिट्ठी पकड़ाए *बड़े दिन हो गए*…. ।
बड़ा होने का शौक भी
बड़ा था बचपन में….
काला चूरन मुंह में तम्बाकू सा दबाये *बड़े दिन हो गए*…. ।
आजकल खाने में मुझे
कुछ भी नापसंद नहीं….
वो मम्मी वाला अचार खाए
*बड़े दिन हो गए*…. ।
सुबह के सारे काम
अब रात में ही कर लेती हूँ….
सफ़ेद जूतों पर चाक लगाए *बड़े दिन हो गए*….. ।
लोग कहते हैं
अगली बड़ी सलीकेदार है….
दोस्त के झगड़े को अपनी लड़ाई बनाये
*बड़े दिन हो गए*….. ।
वो साइकल की सवारी
और ऑडी सा टशन…
डंडा पकड़ कर कैंची चलाये
*बड़े दिन हो गए*…. ।
किसी इतवार खाली हो तो
आ जाना पुराने अड्डे पर…
दोस्तों को दिल के शिकवे सुनाये
*बड़े दिन हो गए*………..

(poem is a forward by an old friend)

10 thoughts on “Bade din ho gaye

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